नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पत्रकार तरुण तेजपाल की उस याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली, जिसमें उन्होंने समर्पण करने से छूट देने की मांग की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले में आदेश सुनाएगी। इससे पहले छह अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर सजा सुनाई थी।
समर्पण से छूट की मांग पर हुई सुनवाई
जस्टिस आलोक अराधे की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तरुण तेजपाल की याचिका की सुनवाई योग्य होने पर ही सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तेजपाल ने समर्पण से छूट के लिए अलग से कोई याचिका दाखिल नहीं की है।
तुषार मेहता ने यह भी दलील दी कि तेजपाल ने ऐसा कोई प्रमाण-पत्र भी पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के नियम, 2013 के तहत समर्पण कर दिया है।
कपिल सिब्बल ने दी अलग दलील
तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने गोवा सरकार की दलील का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के नियम लागू नहीं होते, क्योंकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने तेजपाल को पहले ही समर्पण करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
सिब्बल ने पीठ से अनुरोध किया कि मामले को 31 अगस्त को नियमित पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाए। उन्होंने कहा कि तेजपाल के पास समर्पण करने के लिए सितंबर के पहले सप्ताह तक का समय है।
सुप्रीम कोर्ट अब सुनाएगा आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर ली। पीठ ने कहा कि वह इस मामले में आदेश देगी। अब सभी की नजरें शीर्ष अदालत के उस आदेश पर हैं, जिसमें तरुण तेजपाल की समर्पण से छूट की मांग पर फैसला होगा।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाई है 10 साल की सजा
इस मामले में छह अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को दुष्कर्म का दोषी ठहराया था और उन्हें 10 साल की कठोर सजा सुनाई थी। इसके बाद समर्पण से छूट की मांग को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सोमवार को इस पर सुनवाई पूरी हुई।
